- दस वर्ष की जेल, पांच लाख तक जुर्माना
- गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश जल्द
लखनऊ। प्रदेश सरकार गोवंशीय पशुओं की रक्षा तथा गोकशी की घटनाओं से संबंधित अपराधों को सख्ती से रोकने, गोवध निवारण कानून को और अधिक सुदृढ़ व प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश लायेगी। इसके लिए मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश के मसौदे को मंजूरी दे दी है।
मंत्रिमंडल की बैठक में इसके अलावा 14 और निर्णयों पर भी मुहर लगी है। इनमें यूपी उत्तर प्रदेश निवेश प्रोत्साहन एवं सुविधा एजेन्सी के गठन को मंजूरी भी शामिल है। इसके अलावा जिला पंचायतों के लेखाकारों का द्विस्तरीय ढांचा बनाये रखने एवं लेखाकार के पद को कार्य अधिकारी के पोषक संवर्ग में पूर्व की भांति यथावत बनाये रखने, राज्य वित्त आयोग के अन्तर्गत कार्यों की अनुमन्यता सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है।
ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और निराश्रित परिवारों को मदद तथा गौ-संरक्षण केन्द्रों के लिए विभिन्न कार्य अनुमन्य किये गये हैं। उप्र औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के अन्तर्गत राज्य में निवेश को बढ़ावा देने हेतु सरकार द्वारा निर्धारित विभिन्न नीतियों एवं पूर्वगामी अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 के अन्तर्गत संचालित योजनाओं में इन्सेन्टिव के रूप में एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति की सुविधा हेतु मानक परिचालन प्रक्रिया के निर्धारण का प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया है।
प्राविधिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत रिक्त प्रवक्ता के पदों पर मानदेय/संविदा के आधार पर सेवानिवृत्त शिक्षकों से अध्यापन कार्य लिये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है। इसके अलावा राजकीय मेडिकल कॉलेजों में संविदा के आधार पर चयन हेतु चिकित्सा शिक्षकों की अधिकतम आयु सीमा में वृद्धि का प्रस्ताव भी मंजूर हुआ है। लखनऊ-बलिया राज्य मार्ग संख्या-34 के आजमगढ़ से मऊ तक मार्ग के 4-लेन चैड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य हेतु पुनरीक्षित लागत 43,294.90 लाख रुपये के व्यय की मंजूरी भी दी गयी है।
इस कानून के तहत दोषी पाये जाने पर अधिकतम दस वर्ष की सजा के साथ 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को उनके सरकारी आवास पर सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश, 2020 के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान की गयी।
इस अध्यादेश को प्रख्यापित कराये जाने तथा उसके प्रतिस्थानी विधेयक के आलेख पर विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त करते हुए उसे राज्य विधान मण्डल में पुर:स्थापित कराये जाने का निर्णय भी मंत्रिपरिषद द्वारा लिया गया है। यह निर्णय राज्य विधान मण्डल का सत्र न होने तथा शीघ्र कार्यवाही किये जाने के दृष्टिगत संशोधन के लिए अध्यादेश प्रख्यापित कराये जाने की आवश्यकता के मद्देनजर लिया गया है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 दिनांक 6 जनवरी, 1956 को प्रदेश में लागू हुआ था। वर्ष 1956 में इसकी नियमावली बनी। वर्ष 1958, 1961, 1979 एवं 2002 में अधिनियम में संशोधन किया गया तथा नियमावली का वर्ष 1964 व 1979 में संशोधन हुआ।
परन्तु अधिनियम में कुछ ऐसी शिथिलताएं बनी रहीं, जिसके कारण यह अधिनियम जन भावना की अपेक्षानुसार प्रभावी ढंग से कार्यान्वित न हो सका। और प्रदेश के भिन्न-भिन्न भागों में अवैध गोवध एवं गोवंशीय पशुओं के अनियमित परिवहन की शिकायतें प्राप्त होती रही थीं। उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान प्रदेश है तथा इसके आर्थिक एवं सामाजिक ढांचे में गोवंशीय पशु कृषकों के मेरूदण्ड के समान है।
उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 (यथासंशोधित) की धारा-8 में गोकशी की घटनाओं के लिए 7 वर्ष की अधिकतम सजा का प्राविधान है। उक्त घटनाओं में सम्मिलित लोगों की जमानत हो जाने के मामले बढ़ रहे हैं। गोकशी की घटनाओं से सम्बन्धित अभियुक्तों द्वारा न्यायालय से जमानत प्राप्त होने के उपरान्त पुन: ऐसी घटनाओं में संलिप्त होने के प्रकरण परिलक्षित हो रहे हैं।
इन सभी कारणों से जन भावना की अपेक्षा का आदर करते हुए यह आवश्यक हो गया कि गोवध निवारण अधिनियम को और अधिक सुदृढ़, संगठित एवं प्रभावी बनाया जाए। इन्हीं बिन्दुओं पर विचार करते हुए वर्तमान गोवध निवारण अधिनियम, 1955 में संशोधन किए जाने का निर्णय लिया गया है। मूल अधिनियम की धारा 5 (क) में उपधारा (5) के पश्चात इन उपबंधों को अध्यादेश में सम्मिलित किया गया है।





