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कंस का वध कर, श्रीकृष्ण ने दिया अत्याचार से मुक्ति का संदेश

चैती महोत्सव का पांचवां दिन

लखनऊ । ऐशबाग रामलीला मैदान में बह रहे श्रीकृष्ण की भक्ति के सागर में डुबकी लगाने पहुंचे दर्शकों ने सोमवार की लीला में देखा कि मथुरा में दुराचारी राजा कंस श्री कृष्ण के पराक्रम की लीलाएं सुन कर और ज्यादा भयभीत हो रहा है और कृष्ण को मारने की योजनाएं बना रहा है । इसी क्रम में उसने कृष्ण को मथुरा बुलाने के लिए अक्रूर जी को चुना, क्योंकि वे कंस के विश्वासपात्र होने के साथ ही नंदबाबा के रिश्ते के भाई और श्री कृष्ण के प्रिय थे इस लिए कंस उन्हे यह जिम्मेदारी सौंपता है, अक्रूर जी जो श्रीकृष्ण के परम भक्त भी थे और कंस के मंत्री भी परंतु अक्रूर जी का उद्देश्य कृष्ण को किसी तरह का नुकसान पहुँचाना नहीं था बल्कि कंस की साजिश को जानते हुए भी कृष्ण की लीला में सहयोग करना था इसी आशा के साथ वे कृष्ण को लेने नंदगांव की ओर निकल पड़ते हैं ।
वृंदावन की यात्रा के दौरान अक्रूर जी लगातार भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते रहे यात्रा उपरान्त जब वे वृंदावन पहुँचे तो श्रीकृष्ण की भक्ति में भावविभोर हो उठे ।
नंदबाबा और माता यशोदा की आज्ञा लेकर अक्रूर जी श्रीकृष्ण और बलराम को लेकर मथुरा के लिए चल पड़ते हैं जहाँ रास्ते में यमुना स्नान करते हुए उन्हे भगवान के चतुर्भुज स्वरूप के दर्शन प्राप्त होते हैं ।
मथुरा पहुंचने पर प्रजा द्वारा कन्हैया और बलराम का भव्य स्वागत किया जाता है इसी कड़ी में भगवान श्रीकृष्ण की भेंट कुबजा नामक स्त्री से होती है जो श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थी, कुबजा कंस के लिए सुंगध और पुष्प लेकर जा रही थी जो उसने रास्ते में मिले श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिए । अपनी भक्त की भक्ति से प्रसन्न हो कृष्ण उसे स्पर्श करते हैं तो वह एक सुंदर नारी के स्वरूप में परिवर्तित हो जाती है । इस प्रकार कुबजा का उद्धार कर श्री कृष्ण कंस के यज्ञशाला में पहुंचते हैं जहाँ उन्हे मारने की नीयत से उन पर षड्यंत्र कारी हमला किया जाता है जिसे वे विफल कर देते हैं और यज्ञ में रखे भगवान शिव के धनुष को भंग कर दुराचारी कंस का वध कर मथुरवासियों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाते हैं ।
कंस वध के उपरांत लीला का मंचन देख रहे सैकडो भक्तों द्वारा वृंदावन विहारी लाल की जय का जोरदार उदघोष पूरे मैदान में गुंजायमान हो उठा इसी के साथ पांचवे दिन की लीला का समापन हो जाता है ।
प्रतिदिन की ही भांति सोमवार को भी चैती महोत्सव के मंच का शुभारंभ नृत्य कला के माध्यम से किया गया जिसका आरंभ चैती महोत्सव के पांचवें दिन मंच का आरंभ अनुरूप डांस अकादमी द्वारा अनुष्का श्रीवास्तव के संयोजन में स्वागतम कृष्णा, फूलों की होली, रणछोड़ रंगीला, राधा कृष्णा और गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो, पर नृत्य प्रस्तुतियां के साथ किया गया ।
इसके उपरांत नृत्य निर्देशक डा० राघवेन्द्र प्रताप सिंह के निर्देशन में नटवरी रंग की प्रस्तुतियां आरंभ हुईं इसमें विष्णु वंदना, नृत्य नाटिका “सत्यभामा का घमण्ड”, मयूर नृत्य के साथ ही बृज की होरी का नृत्य भाव से सुंदर प्रस्तुतिकरण किया गया जिसे वान्या चौधरी, आभ्या मौर्या, अविका चतुर्वेदी, मृणालिनी यादव, स्वरांजली मिश्रा, आरवि शुक्ला, दर्शिका चौहान, श्मायरा छाबरा, आराध्या सिन्हा, ममता यादव एवं अदयांशी चौहान ने अपने नृत्य कौशल से खूब सजाया ।
ऐशबाग रामलीला समिति के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल ने बताया है कि भास्कर नाट्य कला केंद्र कोलकाता के कलाकारों के द्वारा की जाने वाली श्री कृष्णलीला लोगों को पसंद आ रही है जिससे दर्शकों की संख्या में प्रतिदिन बढोत्तरी हो रही है ।
हरीशन्द्र अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार की लीलाओं में माता देवकी और वसुदेव जी को कारागार से मुक्त कराने, राजा उग्रसेन को पुन: राज्य प्रदान करने, नंदराय जी को मथुरा से विदा करने, श्री कृष्ण और बलराम का संदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने, जरासंध वध और उद्धव चरित्र द्वारा प्रेम भक्ति की शिक्षा देना जैसे प्रसंग मुख्य आकर्षण होंगे ।

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