रवीन्द्रालय चारबाग में लखनऊ पुस्तक मेला : छठा दिन
अफसाना लिख रहा हूं सहित पुस्तकों का विमोचन और काव्य की गूंज
लखनऊ। रवीन्द्रालय चारबाग में चल रहे लखनऊ पुस्तक मेले में हिन्दी और अंग्रेजी किताबों के साथ यहां उर्दू में भी पुस्तकें खूब हैं। नवाबी शहर के लोगों को उर्दू किताबें भी लुभा रही हैं।
मेले में विलायत पब्लिकेशन की ज्यादा मांग वाली किताबों में उर्दू और अंग्रेजी में प्रकाशित दि स्टेटस आफ वुमेन में इस्लामी दृष्टिकोण से स्त्री की विवेचना की गयी है। स्टाल धारक रियाज हैदर बताते हैं कि उर्दू में छपी सैयद मोहम्मद तबा तबाई की लिखी किताब इस्लाम और आज का इंसान भी पसंद की जा रही है। उर्दू के साथ हिन्दी में छपी सैयद अली खामेनई की दो सौ पचास साला इंसान की भी मांग है। इस्लामी साहित्य के संग ही कुछ किताबें अमजद अली शाह जैसे अवध के नवाबों पर भी हैं।
नेशनल बुक ट्रस्ट के स्टाल पर उर्दू में मध्यकालीन भारत, जैसी तथ्यपरक किताबों के साथ ही गालिब, फिराक गोरखपुरी, बलराज साहनी, साहिर लुधियानवी और नेहरू सुभाष चन्द्र बोस जैसी कई राजनीतिक हस्तियों पर किताबें हैं। ग्रीन पाम के स्टाल पर उर्दू में उपनिवेशवाद का इतिहास विषय पर 12 पुस्तकों का सेट खास है।
डा.राखी बख्शी और मनीष शुक्ल द्वारा सम्पादित पुस्तक अफसाना लिख रहा हूं का विमोचन पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक अनुपमा जायसवाल ने राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीशचंद्र मिश्र, उप्र संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह और पत्रकारिता विभाग लविवि के अध्यक्ष प्रो.सौरभ मालवीय व श्रीधर अग्निहोत्री की उपस्थिति में किया। शिल्पायन द्वारा प्रकाशित और फिल्मी पृष्ठभूमि पर लिखी पुस्तक के अलका प्रमोद के संचालन में चले समारोह में वक्ताओं ने किताब की खूबियों के बारे में बताया।
इससे पहले दिन में साहित्य वीथिका की मंजूषा श्रीवास्तव मृदुल के संयोजन, मंजूषा श्रीवास्तव मृदुल के संयोजन और राजेश मेहरोत्रा राज के संचालन में काव्यगोष्टी हुई। यहां डा.शोभा दीक्षित ‘भावना, डा.अर्चना श्रीवास्तव, हरीशचंद्र निशांत व चन्द्रदेव दीक्षित जैसे अतिथियों की उपस्थिति में प्रतिभा गुप्ता, निशा नवल, मीनाक्षी पीयूष, पूजा श्रीवास्तव, श्वेता श्रीवास्तव, शालिनी सिन्हा, आलोक रावत आहत, जितेंद्र पाल सिंह दीप, संदीपिका दीक्षित, वर्षा श्रीवास्तव, कौसर रिजवी और ज्योति किरन रतन ने रचना पाठ किया।
इसी क्रम में नवसृजन के तत्वावधान में पुष्पा गुप्ता दोसर के लघुकथा संग्रह चित् चिन्मय व कविता संग्रह भावांजलि अतरंग गूंज के साथ ही अनिल किशोर शुक्ल की कृति मेरे अष्टपदी अगीत का विमोचन हुआ। चन्द्रपाल सिंह चंद्र की वाणी वंदना के बाद प्रो.उषा सिन्हा की अध्यक्षता, डा.सुधा मिश्रा के संचालन और डा.योगेश के संयोजन में अतिथियों सुल्तान शाकिर हाशमी व नरेंद्र भूषण के साथ ही मंजू सक्सेना और त्रिवेणी प्रसाद दुबे मनीष ने कृतियों पर विचार रखे। कार्यक्रम में देवेश द्विवेदी देवेश तथा मनु वाजपेयी का सहयोग रहा। शाम को मीर तकी मीर फाउंडेशन का मुशायरा हुआ।





