बेगम अख्तर की स्मृति में होगा आयोजन
लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में भारतीय संगीत की महान परंपरा को सजीव बनाए रखने तथा देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से महान संगीत विभूतियों की स्मृति में विशेष चेयर की स्थापना की गई है। इसी क्रम में पद्मविभूषण से अलंकृत, भारतीय शास्त्रीय एवं सुगम संगीत की अमर स्वर-साधिका विदुषी बेगम अख्तर जी की स्मृति में आयोजित किए जा रहे प्रथम कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय द्वारा अत्यंत गरिमामय रूप से किया जा रहा है।
इस विशिष्ट अवसर पर भारतीय भक्ति संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले, पद्मश्री से सम्मानित एवं विश्वविख्यात भजन सम्राट अनूप जलोटा जी अपनी सुमधुर एवं भावपूर्ण संगीत प्रस्तुति से श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर करेंगे। उनकी प्रस्तुति न केवल संगीत प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगी, बल्कि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए भारतीय संगीत की सूक्ष्मताओं को समझने का एक दुर्लभ अवसर भी प्रदान करेगी।
यह भव्य एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम दिनांक 19 जनवरी 2026 को सायं 5:00 बजे भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के कलामंडपम प्रेक्षागृह में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार के साथ-साथ संगीत जगत से जुड़े विद्वान, कलाकार, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा संगीत प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में अध्ययनरत शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय, उपशास्त्रीय एवं सुगम संगीत की समृद्ध परंपरा से एवं संगीत तकनीक से परिचित कराना, महान संगीत विभूतियों की कला-साधना, जीवन मूल्यों एवं सांस्कृतिक योगदान को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करना तथा इस अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाना है।
स्थापित चेयर के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा भारत की संगीत एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े अनेक व्याख्यान, संगोष्ठियाँ, कार्यशालाएँ, संगीत प्रस्तुतियाँ एवं शोधपरक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे संगीत शिक्षा में अनुसंधान की अनेक संभावनाएं विकसित हुई ।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ भविष्य में भी इस प्रकार के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन करता रहेगा। ये कार्यक्रम शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में जोड़ने, महान संगीत विभूतियों के योगदान को जन-जन तक पहुँचाने एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए समर्पित होंगे।
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सृष्टि धवन ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे कार्यक्रम उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ संगीत को समाज सेवा एवं संवेदनशीलता का माध्यम बनाने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय सदैव सामाजिक दायित्व एवं सामुदायिक सेवा के प्रति प्रतिबद्ध रहा है और इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से विश्वविद्यालय अपने इस संकल्प को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाएगा।





