तुला को संतुलन, न्याय और विश्वास का प्रतीक माना जाता है
लखनऊ। माघ मास में गंगा-यमुना सहित देश की विभिन्न पवित्र नदियों के तटों और मंदिरों में तुलादान का पुण्य अर्जित करने की परम्परा तेजी से निभाई जा रही है।
तराजू अर्थात तुला को संतुलन, न्याय और विश्वास का प्रतीक माना जाता है, इसलिए व्यक्ति के वजन के बराबर अन्न, तेल, घी, गुड़, तिल, फल, वस्त्र, सोना-चांदी या अन्य सामग्री का दान करने को तुलादान कहा जाता है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से जीवन में संतुलन बना रहता है, मानसिक शांति प्राप्त होती है और आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
इसी भावना के साथ दिल्ली से मथुरा पहुँचीं जनक दुलारी शर्मा ने अपने पुत्र मुकेश कुमार शर्मा, पुत्रवधू विभा शर्मा, पौत्र आदित्य नमन और पौत्री उन्नति प्रिया के साथ यमुना जी के तट पर स्थित विश्राम घाट के तुला दान मंदिर में विधि-विधान से तुलादान संपन्न किया। उन्होंने बताया कि ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, परिवार की उन्नति, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, स्वास्थ्य, सुख-शांति और समृद्धि की कामना से यह दान किया गया। तुलादान के इस शुभ अवसर पर परिवार के अन्य सदस्य देश के विभिन्न हिस्सों से वीडियो कॉल और दूरभाष के माध्यम से जुड़े रहे, जिससे यह आयोजन एक आध्यात्मिक पारिवारिक उत्सव का रूप लेता दिखाई दिया। तुलादान की प्रक्रिया संपन्न करा रहे पंडित गिरिराज ने बताया कि माघ मास, मकर संक्रांति, पूर्णिमा और अन्य शुभ तिथियाँ तुलादान के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती हैं। अनेक श्रद्धालु जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ, किसी संकट से मुक्ति, रोग निवारण, कुंडली दोष शांति अथवा जीवन में संतुलन और समृद्धि की कामना से भी यह अनुष्ठान करते हैं। उन्होंने कहा कि तुलादान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का एक श्रेष्ठ माध्यम भी है। धार्मिक आस्था और परोपकार की भावना से जुड़ा यह अनुष्ठान लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास का संचार करता है, जिसके कारण माघ मास में तुलादान का विशेष महत्व माना जाता है।





