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संघर्ष और आत्मविश्वास का संदेश देता है ‘आश्वासनम’

नाटक आश्वासनम का मंचन अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान प्रेक्षागृह में
लखनऊ। संस्था विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर, लखनऊ द्वारा उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत भाषा को आम जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित पंद्रह दिवसीय प्रस्तुतिपरक संस्कृत नाट्य कार्यशाला के उपरांत कार्यशाला में तैयार नाटक आश्वासनम का मंचन अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान प्रेक्षागृह, गोमती नगर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर के संस्कृत साहित्य विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ0 परितोष दास, ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्र एवं डा. आदर्श गर्ग ने दीप प्रज्ज्वलन करके किया।
नाटक का लेखन डॉ. ओम प्रकाश त्रिपाठी ने किया है तथा निर्देशन चन्द्रभाष सिंह ने किया। कार्यशाला में प्रशिक्षित प्रतिभागियों ने ही विभिन्न पात्रों का प्रभावशाली अभिनय करते हुए दर्शकों की सराहना प्राप्त की।
कौटिल्य (चाणक्य) के प्रसिद्ध कथन यथा राजा तथा प्रजा को आधार बनाकर रचित यह नाटक समकालीन समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और युवाओं की बेरोजगारी की समस्या को प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करता है। कथा एक मेधावी किंतु बेरोजगार युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे अपनी योग्यता और परिश्रम के बावजूद रोजगार नहीं मिल पाता। समाज के जिम्मेदार लोग उसे बार-बार केवल आश्वासन देते हैं, जबकि अयोग्य लोग नेताओं के सगे-संबंधी या चाटुकार होने के कारण पद प्राप्त कर लेते हैं। नाटक में यह भी दशार्या गया कि किस प्रकार एक भ्रष्ट नेता सेवा और सहायता के नाम पर रिश्वत लेकर लोगों को नौकरी दिलवाता है। योग्य युवक को केवल आश्वासन मिलता है, जबकि रिश्वत देने वाला व्यक्ति नौकरी प्राप्त कर लेता है। इन परिस्थितियों से निराश युवक को उसका मित्र समझाता है कि केवल सरकारी नौकरी ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि मनुष्य को अपने प्रयासों से नए रास्ते तलाशने चाहिए और समाज में फैले भ्रष्टाचार के विरुद्ध जागरूक होकर खड़ा होना चाहिए। नाटक में जूही कुमारी, लता बाजपेयी, अगम्या बाजपेयी, मुकुल कुमार, उन्नत बहादुर और कृष्ण कुमार पांडेय सहित अन्य कलाकारों ने सशक्त अभिनय किया।

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