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भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क किया गया 15 प्रतिशत कम
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित इकाइयों को दोहरे टैक्स से मिलेगी मुक्ति
लखनऊ। उत्तर प्रदेश को इंडस्ट्रियल हब के तौर पर विकसित करने के मंसूबे के तहत राज्य सरकार अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गयी है। मुख्यमंत्री द्वारा उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की बैठक में की गयी घोषणाओं के कुछ ही घंटों के अंदर औधोगिक इकाइयों स्थापित करने के लिए कई बड़े निर्णय लिए गये हैं।
अभी तक ज़मीन मिलने में आ रही अड़चनों को दूर करने के मकसद से अब तय किया गया है कि आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा औधोगिक इकाइयों की स्थापना के लिए भू-उपयोग परिवर्तन के आवेदनों को 90 दिन की समय सीमा के तहत निस्तारित किया जायेगा।
इकाइयों को भारी राहत देते हुए कृषि से औधोगिक श्रेणी में भू-उपयोग शुल्क को घटाकर सर्किल रेट के 35 प्रतिशत की दर की जगह 20 फीसद करने का निर्णय लिया गया है। बड़े भू-खण्डों पर टेलीस्कोपिक दरों को शामिल करते हुए यह फीस सिर्फ 14 प्रतिशत रह जायेगी, जिससे इकाइयों को काफी हद तक राहत मिलेगी।
ग्रामीण इलाकों में स्थित औधोगिक आस्थानों व औधोगिक क्षेत्रों में इकाइयों को दोहरे टैक्स से छुट्टी मिलेगी। इसके अलावा जिला पंचायतों द्वारा इकठ्ठा किये गये टैक्स का कम से कम 60 फीसद उसी औधोगिक क्षेत्र के रख-रखाव में खर्च किया जायेगा।
यूपीसीडी मेरठ में बंद पड़ी कताई मिल की ज़मीन पर नया औधोगिक क्षेत्र विकसित किया जायेगा। जिलाधिकारियों को हर महीने अनिवार्य तौर से उद्योग बंधु की बैठा बुला कर स्थानीय दिक्कतों के निराकरण करने के निर्देश दिये गये हैं।





