रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन का कार्यकाल 2036 तक बढ़ाये के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुतिन को बधाई तथा भारत-रूस संबंधों पर सार्थक चर्चा और भारत-रूस के बीच मेगा डिफेंस डील की खबरों से निश्चित ही चीन परेशान होगा।
चीन की पूरी कोशिश थी कि जब सीमा पर भारत के साथ तनाव चल रहा है तब रूस भारत को अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी रोक दे लेकिन मॉस्को में आयोजित 75वीं विक्ट्री डे परेड में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के शामिल हुए, भारतीय सैनिकों ने रूसी सैनिकों के साथ मार्च पास्ट भी किया और अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस-400 जिसकी डिलीवरी 2022 में मिलनी थी उसे 2021 के मध्य से मिलने का आश्वासन भी रूस से मिल गया।
इससे स्पष्ट है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर उसकी भूमिका तटस्थ रहेगी और भारत के साथ दोस्ती और परम्परागत रक्षा सहयोग पूर्ववत जारी रहेंगे। रूस से भारत को आश्वासन मिलने के बाद से ही चीन बौखलाया है और रूस के कदम को गलत बता रहा है। लेकिन इसी बीच मोदी और पुतिन के बीच हुई बातचीत और दोनों देशों के बीच 18000 करोड़ से अधिक के एक और रक्षा सौदे को मंजूरी मिलने से चीन के होश फाख्ता होंगे।
भारत सरकार ने रूस के साथ पुराने सभी रक्षा सौदों को आगे बढ़ाने के साथ एक और बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी दी है। इसमें 10730 करोड़ रुपये में चतुर्थ श्रेणी के 12 सुखोई-30एमकेआई युद्धक विमान, 7418 करोड़ रुपये की लागत से 21 मिग-29 युद्धक विमानों के सौदे के साथ 59 अन्य मिग-29 विमानों को अपग्रेड करने का अनुबंध भी शामिल हैं। कुल मिलाकर इस सौदे से भारत को 33 नये लड़ाकू विमान मिलेंगे और 59 मिग-29 विमानों को अपग्रेड किया जायेग और दय तरह वायुसेना के बेड़े में ताकतवर पांच स्क्वाड्रन की वृद्धि होगी।
यह भारत-चीन के बीच जारी तनाव के बीच इतना बड़ा कदम है जिसका विश्लेषण न सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सामरिक एवं कूटनीतिक पंडित करने को विवश होंगे बल्कि चाइना और उसके तानाशाह राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी एक बार यह सोचने पर विवश होंगे कि आखिर क्यों चीन के आर्थिक साम्राज्य को धता बताकर पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है और चीन के पास समर्थन के नाम पर उसके दो पिछलग्गू उत्तर कोरिया और पाकिस्तान ही बचे हैं। चीन ने अपनी आर्थिक हैसियत का अश्लीलता से उपयोग कर छोटे-छोटे देशों को कर्ज में फंसाकर उनकी सम्प्रभुता का अपहरण कर लिया।
पड़ोसी देशों की जमीन कब्जाने की कोशिशें करता है, इससे पूरी दुनिया की त्यौरियां तन गयी हैं। कोरोना फैलाकर भी चीन दुनिया भर से दुश्मनी मोल ले चुका है। चीन चारों तरफ से घिर गया है और लगातार उसके आर्थिक सामर्थ्य पर प्रहार हो रहा है। चीनी उत्पादों के बहिष्कार, चीनी आयात पर ड्यूटी लगाने और चीन से मैन्युफैक्चरिंग हटाने काअभियान चल रहा है। इससे चीन का आर्थिक साम्राज्य निश्चित ही कमजोर होगा।
दुनिया भर के आर्थिक पंडित चीन की अर्थव्यवस्था में इसी साल दस प्रतिशत तक कमी आने की बात कर रहे हैं और ऐसा होता है तो यह चीन में बेरोजगारी और आर्थिक तबाही का बड़ा कारण बन सकता है और इस सबके लिए शी जिनपिंग की सनक जिम्मेदार होगी।





