अहं कृष्ण: अस्मि में दिखे श्रीहरि के संघर्षशील मानव जीवन की कहानी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान एवं मस्त रंग लखनऊ की ओर से नाटक अहं कृष्ण: अस्मि का मंचन राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में किया गया। नाटक का लेखन व निर्देशन चंद्रभाष सिंह ने किया।
अह कृष्ण: अस्मि अर्थात मैं कृष्ण हूँ एक विचार प्रधान नाटक है जिसमें भगवान कृष्ण के जीवन को केवल एक ईश्वर के रूप में नहीं, बल्कि एक संघर्षशील मानव के रूप में प्रस्तुत किया गया है। नाटक का सूत्रधार स्वय कृष्ण बनकर दर्शकों से संवाद करता है और बताता है कि उनका जीवन जन्म से ही संघर्षों से भरा था। कथा की शुरूआत कृष्ण के जन्म से होती है. जब अत्याचारी राजा कंस के भय से उनका जीवन संकट में पड़ जाता है। जन्म लेते ही उन्हें माता-पिता से दूर गोकुल भेज दिया जाता है। बाल्यकाल में भी उन्हें अनेक असुरों और संकटों का सामना करना पड़ता है, फिर भी वे धर्म और न्याय की रक्षा करते हैं।
युवावस्था में कृष्ण केवल एक नायक नहीं, बल्कि एक नीति-पुरुष के रूप में सामने आते हैं। वे अत्याचार के विरुद्ध खड़े होते हैं, कंस का अंत करते हैं और समाज को अन्याय से मुक्त करने का प्रयास करते हैं। महाभारत के युद्ध में भी कृष्ण स्वय शस्त्र नहीं उठाते, परंतु धर्म की स्थापना के लिए अर्जुन को मार्गदर्शन देते हैं। नाटक का मुख्य संदेश यह है कि कृष्ण केवल पूजा करने योग्य ईश्वर नहीं है, बल्कि संघर्ष, धैर्य, नीति और कर्तव्य के प्रतीक हैं। नाटक के अत में कृष्ण स्वय कहते हैं कि उन्हें भगवान बनाकर केवल पूजना ही नहीं चाहिए, बल्कि उनके सघर्ष और आदर्शों से सीख लेकर जीवन में उतारना चाहिए। इस प्रकार मैं कृष्ण हूँ’ नाटक दर्शकों को यह सदेश देता है कि महान व्यक्तित्वों की पूजा से अधिक उनके सघर्ष और आदशों को समझना और अपनाना आवश्यक है। नाटक में अहम भूमिका मुकुल कुमार, उज्जवल सिंह, आयुष प्रजापति, लावण्या बाजपेयी, प्राची, दीक्षा आदि ने निभायी।





