अर्थपूर्ण और रचनात्मक रूप से समृद्ध रहा पलाश पर आधारित चित्रकला कार्यशाला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश का राजकीय पुष्प : पलाश – प्रकृति और संस्कृति के संगम में प्रांतीय पहचान का सफल आयोजन 31 मार्च 2026 को एल पी एस की बाराबंकी शाखा में एस्थेटिक एंड कल्चरल डेवलपमेंट प्रोग्राम (2025-26) के अंतर्गत किया गया। इस पहल का उद्देश्य कलात्मक अभिव्यक्ति को पर्यावरणीय चेतना से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को प्रकृति और सांस्कृतिक पहचान के गहरे संबंध से परिचित कराना था। इस कार्यशाला का आयोजन लखनऊ पब्लिक स्कूल एंड कॉलेजेस के कला विभाग द्वारा फ्लोरसेंस आर्ट गैलरी के सहयोग से किया गया। इसका संचालन नेहा सिंह के निर्देशन में तथा प्रधानाचार्या डॉ. रितु सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता रही, जिससे यह एक जीवंत और समावेशी सामुदायिक आयोजन बन गया। कार्यशाला का मुख्य विषय उत्तर प्रदेश के राजकीय पुष्प पलाश (टेसू), जिसे फ्लेम आॅफ द फॉरेस्ट भी कहा जाता है, पर केंद्रित था। अपने चमकीले नारंगी-लाल फूलों के लिए प्रसिद्ध पलाश वृक्ष भारतीय परंपरा में पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह वसंत ऋतु, होली जैसे त्योहारों और लोक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को ऐसे देशज वृक्षों के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन में उनकी भूमिका के महत्व से अवगत कराया गया। कार्यक्रम की शुरूआत एक परिचयात्मक सत्र से हुई, जिसमें विद्यार्थियों और अभिभावकों को कला, संस्कृति और पर्यावरण में पलाश के महत्व की जानकारी दी गई। दृश्य प्रस्तुतियों के माध्यम से इसके प्राकृतिक परिवेश में वृक्ष की सुंदरता और प्रतीकात्मक अर्थ को दशार्या गया। संवादात्मक चचार्ओं ने प्रतिभागियों को प्रकृति के साथ अपने संबंधों पर विचार करने और तीव्र शहरीकरण के दौर में जैव-विविधता संरक्षण की आवश्यकता को समझने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण हैंड्स-आॅन आर्ट सेशन रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने पलाश और उसके परिवेश से प्रेरित चित्रांकन और रंगांकन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। जलरंग, पोस्टर कलर और मिश्रित माध्यमों का उपयोग करते हुए प्रतिभागियों ने अपनी कल्पना और अवलोकन को कागज पर सजीव रूप में व्यक्त किया। अभिभावकों की उपस्थिति ने इस अनुभव को और भी आत्मीय बना दिया, जहाँ कई अभिभावकों ने अपने बच्चों के साथ मिलकर सृजन की प्रक्रिया में भाग लिया। यह कार्यशाला केवल कलात्मक कौशल तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सूक्ष्म अवलोकन पर भी विशेष बल दिया गया। विद्यार्थियों को प्रकृति में उपस्थित आकार, बनावट और रंगों को ध्यानपूर्वक देखने और उन्हें अपनी कलाकृतियों में रूपांतरित करने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे उनकी सृजनात्मक क्षमता के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति उनकी समझ भी गहरी हुई। इस अवसर पर नेहा सिंह ने कहा कि, कला में वह शक्ति है जो व्यक्ति को अपने परिवेश से गहराई से जोड़ती है। इस कार्यशाला के माध्यम से हम बच्चों को प्रकृति की सुंदरता का सम्मान करना और उसकी सांस्कृतिक प्रासंगिकता को समझना सिखाना चाहते हैं। पलाश केवल एक फूल नहीं, बल्कि हमारी क्षेत्रीय पहचान का प्रतीक है।
प्रधानाचार्या डॉ. रितु सिंह ने भी कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी देखकर हमें अत्यंत खुशी हुई। इस प्रकार की कार्यशालाएँ समग्र शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जहाँ कला, संस्कृति और पर्यावरणीय जागरूकता का समावेश होता है। बच्चों के लिए पाठ्यपुस्तकों से परे सीखना और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।
इस कार्यक्रम में विशेष रूप से भूपेंद्र कुमार अस्थाना (फ्लोरसेंस आर्ट गैलरी के क्यूरेटर एवं कला लेखक), राजेश कुमार (कलाकार व कला विभागाध्यक्ष, लखनऊ पब्लिक स्कूल), मनीषा श्रीवास्तव, तथा चित्रकार उत्तम वर्मा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ एवं अभिभावक उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
राजेश कुमार ने बताया कि कार्यशाला में उपस्थित अभिभावकों ने इस पहल की सराहना की और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उनका मानना था कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी सृजनात्मकता विकसित करने के साथ-साथ पर्यावरणीय मुद्दों को समझने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। यह सहयोगात्मक वातावरण अभिभावक और बच्चों के बीच संबंधों को भी सुदृढ़ करता है। कला अध्यापक पीयूष ने बताया कि कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी के साथ हुआ। इस प्रदर्शनी में पलाश की विविध व्याख्याएँ देखने को मिलीं, जो प्रत्येक प्रतिभागी की अनूठी दृष्टि और रचनात्मकता को दशार्ती थीं। रंगों के सजीव प्रयोग और कल्पनाशील संयोजन ने कार्यशाला की सफलता को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित किया।
यह कार्यशाला सभी प्रतिभागियों के लिए एक समृद्ध और प्रेरणादायक अनुभव सिद्ध हुई। इसने कला, संस्कृति और पर्यावरणीय शिक्षा को प्रभावी रूप से एकीकृत करते हुए विद्यार्थियों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। लखनऊ पब्लिक स्कूल एंड कॉलेजेस और फ्लोरोसेंस आर्ट गैलरी द्वारा इस प्रकार की पहलें विद्यार्थियों में सौंदर्यबोध और सांस्कृतिक विकास को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति गहरा जुड़ाव स्थापित कर रही हैं।
यह कार्यक्रम इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि शिक्षा में कला का समावेश विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, सृजनात्मकता और जागरूकता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। पलाश जैसे विषयों के माध्यम से न केवल क्षेत्रीय प्राकृतिक धरोहर का उत्सव मनाया गया, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार और सजग नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया गया।
कला विभाग, फ्लोरोसेंस आर्ट गैलरी और विद्यालय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यशाला इस संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो विद्यार्थियों को सार्थक और समग्र शिक्षण अनुभव प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।





