रवीन्द्रालय चारबाग में लखनऊ पुस्तक मेला : सातवां दिन
सम्मान और काव्य समारोहों के बीच विमोचन
लखनऊ। रवीन्द्रालय चारबाग में चल रहा पुस्तक मेला यूं तो अवसान की ओर बढ़ चला है, पर उसका आकर्षण आसपास के दूसरे शहरों में बना हुआ है। रविवार को समाप्त होने वाले मेले में रायबरेली से दीपक और साथियों की टोली किताबें खरीदने पहुंचे। संडीला के विनोद और सीतापुर के अरिंदम तो आज दोबारा मेले में किताबों के बीच थे। नि: शुल्क प्रवेश और सुबह 11 से रात नौ बजे तक चलने वाले इस मेले में हर पुस्तक पर न्यूनतम 10 प्रतिशत की छूट है, पर कई स्टालों पर ज्यादा छूट मिल रही है। दिव्यांश पब्लिकेशन के स्टाल पर उनके साथ ही हिन्दयुग्म और किताब किंग की किताबों पर 20 फीसदी छूट है। हिन्दी संस्थान के स्टाल पर डा.पीवी काणे की धर्मशास्त्र का इतिहास, डा राजबली पाण्डेय की हिन्दू धर्मकोश, फिराक गोरखपुरी की उर्दू भाषा और साहित्य व डा.रमेश प्रताप सिंह की घाघ और भड्डरि की कहावतें की अच्छी बिक्री हो रही है। यहां सभी किताबों पर 15 प्रतिशत छूट है, जबकि कई पुस्तकों पर अधिकतम 60 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। एंजेल बुक रायपुर के स्टाल पर बुकर पुरस्कार प्राप्त गीतांजलि श्री की रेत समाधि व बच्चन की मधुशाला सहित हिन्दी साहित्य की बहुत सी किताबें 20 प्रतिशत छूट पर हैं तो अंग्रेजी बेस्ट सेलर नावल पांच सौ रुपए में तीन मिल रही हैं। बच्चों के लिए यहां अमर चित्र कथाएं भी खूब हैं।
साहित्यिक मंच पर प्रहर्ष फाउण्डेशन के आयोजन में मुख्य अतिथि भाजपा नेता राजीव मिश्र की उपस्थिति में पत्रकार विपिन शर्मा, समाजसेवी टीपी हवेलिया, लेखक शरद आलोक और रामकृष्ण यादव को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही सुमन दुबे के संयोजन व मुकुल महान के संचालन में की अंशु दुबे वाणी वंदना- शारदेय दिन रैन जपूं तेरा नाम….से कवि सम्मेलन शुरू हुआ। यहां आलोक रंजन मिश्र, प्रमोद द्विवेदी, संजय मिश्र शौक इत्यादि ने गीत और मुक्तक पेश किये।
बृजमोहन अवस्थी की स्मृति में महेंद्र भीष्म की ओर से कृति और कृतिकार के नवें संस्करण में डा.सरला शर्मा के संचालन में राजेश कुमार सिंह श्रेयस के उपन्यास ‘अचानक डूबता सूरज उग आया’ का विमोचन हुआ। कोहबर प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक पर चली चर्चा में महेंद्र भीष्म, दयानंद पांडेय व डा.महेश दिवाकर की उपस्थिति में श्रेयस के संग ही आर्यावर्ती सरोज, सत्या सिंह, डा.करुणा पाण्डेय, डा.अलका प्रमोद, पायल लक्ष्मी सोनू ने अपनी पुस्तकों पर बात रखी। डा.रजनी गुप्त ने समवेत रूप से इन लेखकों की रचनाओं पर समीक्षात्मक दृष्टि डाली।
इससे पहले आज के कार्यक्रमों की शुरूआत अच्छे इलाज के 51 नुस्खे के लेखक डा.संदीप कुमार से बातचीत से शुरू हुई। इसी क्रम में उत्कर्ष द्वारा शिवांशी श्रीवास्तव, अंचल पाण्डेय, अक्षिता सोलंकी और जगजीता की प्रस्तुतियों के बाद वंदे मातरम् पर संगोष्ठी प्रारंभ हुई। संगोष्ठी में उप्र संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष जयंत खोत, शैलेन्द्र दुबे, जय प्रकाश, विनीत चंद्र मिश्र, ओमकार सिंह आदि ने विचार व्यक्त किये। साथ ही अशोक टाटांबरी, शैलेन्द्र मासूम, श्रवण कुमार, किरन भारद्वाज, संचालक, अटल नारायण, कल्पना तिवारी, लक्ष्मी रस्तोगी, सौरभ तिवारी और मालती बच्चन ने रचना पाठ किया।





