गरीब परिवार में पली-बढ़ी और अपनी प्रतिभा के दम पर सपनों की ऊंची उड़ान भरने वाली गौतमबुद्ध नगर की सुदीक्षा भाटी की मौत से पूरा प्रदेश दुखी है और आत्मग्लानि महसूस कर रहा है। क्या हम ऐसे ही बेटियों को आगे बढ़ायेंगे?
बेटियों के लिए रास्ता बनाने के बजाय जो खुद जद्दोजहद कर अपना रास्ता बनाने में कामयाब हो रही हैं वे लम्पटों की भेंट चढ़ जा रही हैं। बुलंदशहर में सुदीक्षा भाटी के साथ छेड़छाड़ और इसके चलते हुई दुर्घटना से सुदीक्षा की मौत इतनी शर्मनाक घटना है जिसको शब्दों में बयां करना कठिन है, लेकिन इससे भी अधिक दुखद रवैया स्थानीय पुलिस का है जो बिना जांच पड़ताल के कानून व्यवस्था के गंभीर मुद्दे को हादसे में खत्म करना देना चाहती है।
सुदीक्षा गरीब परिवार की बेटी थी और प्राइमरी पाठशाला से उसने पढ़ाई की थी। एचसीएल की परीक्षा पास कर उसने शिव नडार फाउंडेशन द्वारा संचालित स्कूल में दाखिला लिया और सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा में 2018 में जिला टॉप किया था।
सुदीक्षा की प्रतिभा को देखते हुए एचसीएल ने उसे 3.8 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप दी थी और इसी स्कॉलरशिप से वह अमरीका में पढ़ाई कर रही थी। कोरोना संकट के कारण स्कूल बंद है और इसलिए वह स्वदेशी लौटी थी।
सुदीक्षा को 20 अगस्त को वापस अमरीका जाना था लेकिन वह अमरीका लौटने से पहले बुलंदशहर में अपने मामा के घर मिलने जा रही थी।
गौतमबुद्धनगर जनपद के दादरी तहसील से सुदीक्षा अपने भाई और चाचा के साथ जब बुलंदशहर के पास पहुंची तो वहां पर बुलेट सवार दो मनचलों ने उस पर फब्तियां कसना व कमेंट करना शुरू कर दिया।
बुलेट सवार गुंडे कभी सुदीक्षा के स्कूटर के पीछे लग जाते कभी ओवरटेक कर आगे हो जाते और इस तरह उसे परेशान करने लगे। इन बुलेट सवार गुंडों से बचने के प्रयास में सुदीक्षा भाटी का एक्सीडेंट हो गया और उसकी मौत हो गयी।
लड़कियों के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस तरह की घटनाएं कोई नहीं बात नहीं हैं। पिछले दिनों छेड़छाड़ रोकने पर गुंडों ने एक पत्रकार की हत्या कर दी थी।
हरियाणा में ऐसी तमाम घटनाएं हुई हैं जिसमें प्रतिभवान लड़कियों को जान गंवानी पड़ी। सुदीक्षा प्रतिभावान छात्रा ही नहीं थी बल्कि वह अन्य लोगों को भी बेटियों को पढ़ाने के लिए प्रेरित करती थी।
परिवारों से मिलकर बेटियों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करती थी। इतनी प्रतिभावान बेटी की मौत छेड़छाड़ के कारण होना आत्मग्लानि से भर देता है।
इस घटना से स्पष्ट है कि बेटियों के लिए सुरक्षित माहौल नहीं है और अगर ऐसी घटनाओं पर लीपापोती होगी तो फिर कभी सुरक्षित माहौल बनेगा भी नहीं।
सुदीक्षा की मौत छेड़छाड़ के कारण हुई, इसलिए पुलिस का कर्तव्य था कि वह रिपोर्ट लिखकर दोषियों को पकड़ती, लेकिन वह यह साबित करने में जुट गयी कि गाड़ी सुदीक्षा के चाचा नहीं चला रहे थे, नाबालिग भाई चला रहा था, यह भी कि हेल्मेट भी नहीं पहने थी। यह सब भी तो कानून लागू करने में कोताही का ही उदाहरण है। अगर हेल्मेट नहीं था तो उसे सड़क पर चलने ही क्यों दिया गया?
बहरहाल प्रदेश की एक प्रतिभावान बेटी की इस तरह मौत पूरे प्रदेश को शर्मसार करती है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दोषियों को सुनिश्चित दण्ड के साथ सुरक्षा उपायों को भी बढ़ाना होगा और पुलिस को अपना रवैया भी बदलना होगा। सरकार को भी हमेशा अपनी पीठ थपथपाने के बजाय सच स्वीकारने का साहस दिखाना चाहिए।





